Thursday, March 5, 2009

अम्बरीष श्रीवास्तव "वास्तुशिल्प अभियंता" की कवितायेँ

"होली के रंग "
तेरे दीदार को तरसे हैं हम .......
सूरत तो दिखाने जा.......|
कैसे मिलते तुझसे........
रंगों के बहाने जा .......

रंग प्यार के हम सब घोलें........
अपनेपन के हों गुब्बारें ......|
रंगों की तेज धार से........
बह जांय नफरत की दीवारें .....||

ऐसे रंगना हमें........
दुश्मन पे प्यार जाए.......|

भूलकर शिकवे सारे. ......
गले मिल लें बहार आ जाए.....||

रचयिता ,
अम्बरीष श्रीवास्तव "वास्तुशिल्प अभियंता"
91/९१, सिविल लाइंस सीतापुर , उत्तर प्रदेश , इंडिया ( भारतवर्ष )
मोबाइल : +९१९४१५०४७०२० +919415047020
ईमेल: ambarishji@gmail.com
website: www.ambarishsrivastava.com

अम्बरीष श्रीवास्तव "वास्तुशिल्प अभियंता" की कवितायेँ



"माँ सरस्वती वंदना "

हे, ज्ञान की ज्योति, जगाने वाली.......
हे, अमृत रस, वर्षाने वाली.........
तेरी, महिमा अपरम्पार,
तुझको, पूज रहा संसार .........

हे, ज्ञान की ज्योति, जगाने वाली.......

जो जन तेरी, शरण में आते,
बल बुद्धि विद्या, ज्ञान हैं पाते ..........
हे मोक्षदायिनी, देवी माता ......
कर दो बेड़ा पार ...........
तुझको पूज रहा संसार .........

हे, ज्ञान की ज्योति, जगाने वाली.......

हम पर कृपा बनाये रखना ,
ज्ञान से मन हर्षाये रखना .....
हे वीणाधारिणी हंसवाहिनी .......
हर लो, जग का सब अंधकार .......
तुझको पूज रहा संसार ....

हे, ज्ञान की ज्योति, जगाने वाली.......2

रचयिता ,
अम्बरीष श्रीवास्तव "वास्तुशिल्प अभियंता"
91/९१, सिविल लाइंस सीतापुर , उत्तर प्रदेश , इंडिया ( भारतवर्ष )
मोबाइल : +९१९४१५०४७०२० +919415047020
ईमेल: ambarishji@gmail.com
website: www.ambarishsrivastava.com